भिखारी के दशा.. पापी बना है पेट जो॥ दर-दर भटक रहा हूँ॥ छोटी से लेके झोली॥ घर-घर टहल रहा हूँ। बच्चे है छोटे -छोटे॥ घर में गरीबी चाई॥ लगता है मेरे घर में॥ मौसमी बिमारी आयी॥ जिंदगी में जान कम है॥ फ़िर भी उछल रहा हूँ॥ छोटी से लेके झोली॥ घर-घर टहल रहा हूँ। रोते बिलखते बच्चे तो॥ आँखे टपक जाती॥ पत्नी की नाजुक हालत॥ रह-रह के हमें रूलाती॥ जिंदगी के ले सवारी॥ सड़को में मटक रहा हूँ॥ छोटी से लेके झोली॥ घर-घर टहल रहा हूँ। |